तुम्हारे सामने आते ही दिल की धड़कन बढ़ जाती है,
तुम्हारी झुल्फो की छाव में मेरी शाम ढल जाती है,
तुम्हारी इन आँखों में मुझे सिर्फ शर्म(मोहब्बत) नज़र आती है,
होठ जैसे पंख गुलाब के,कानो की बाली पे भी मेरी तो जान जाती है,
पैरो की पायल,हाथो के कंगन,नासिका पे सजी चुनी भी मुझे लुभाती है,
तुम्हारे रूप की सुन्दरता में में और डूब जाऊ इससे पहेले,
कमबख्त ये सूरज की किरणे मुझे जगा देती है-विशाल